Akshay Kumar and Priyanka Chopra completed 18 years of starrer ‘Andaaz’, producer Sunil Darshan said- Music plays important role in the success of the film | अक्षय कुमार और प्रियंका चोपड़ा स्टारर ‘अंदाज’ को हुए 18 साल पूरे, प्रोड्यूसर सुनील दर्शन बोले- फिल्म की कामयाबी में म्यूजिक ने चार चांद लगाए


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32 मिनट पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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प्रोड्यूसर सुनील दर्शन, डायरेक्टेड राज कंवर, अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा और लारा दत्ता स्टारर फिल्म ‘अंदाज’ को रिलीज हुए आज (23 मई, 2021) 18 साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर यह फिल्म जी बालीवुड पर दिखाई जाएगी। सुनील दर्शन का कहना है कि अक्षय कुमार के करियर में ‘जानवर’, ‘एक रिश्ता’ और ‘अंदाज’ बहुत इंपोर्टेंट फिल्म रही है। उन्होंने फिल्म ‘जानवर’ से फिल्मों में वापसी की थी। उन्होंने ‘एक रिश्ता’ में अमिताभ बच्चन के साथ काम करके अपने नाम को बड़ा बनाया और ‘अंदाज’ से बतौर एक्टर फिल्मों को अपने कंधे पर चलने के लिए मजबूत किया। इसके बाद अक्षय कुमार को कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। यह मेरा सौभाग्य है कि 18 साल बाद भी लोगों को यह फिल्म याद है। इसके लिए आज तक लोग मुझे मैसेज करते हैं।

यूं बना अक्षय के साथ हमारा रिश्ता

मैं एक कामयाब हीरो के साथ लगभग फिल्म शुरू करने ही वाला था। हमारी बात पक्की हो गई थी। तभी एक दिन अक्षय कुमार का फोन आया, उन्होंने मिलने की इच्छा जाहिर की। उनसे मिलने के बाद ऐसा लगा कि इस समय उनका करियर गड़बड़ है, लेकिन आदमी डिसीप्लींड है, 110 पर्सेंट देने की बात ऑफर कर रहा है तब एक फिल्म से भले न कमाऊं पर अच्छी फिल्म बनाने की इजाजत मिल रही है, तो इनके साथ जरूर काम करूंगा। अगर अच्छी फिल्म बन गई तो जरूर चलेगी। इस विश्वास के साथ ‘जानवर’ की शुरुआत हुई। इसके दौरान एक एक्टर और डायरेक्टर का अच्छा एसोसिएशन बना। यह फिल्म बहुत कामयाब रही तो लोगों ने अक्षय कुमार के प्रति देखने का नजरिया बदलना शुरू किया। ‘जानवर’ के बाद जब अक्षय को ‘एक रिश्ता’ में बाप-बेटे की कहानी सुनाई, तब वे बहुत एक्साइटेड हुए। फिल्म में अक्षय बेटे के रोल में थे। इसके बाद एक दिन मुझे अमिताभ बच्चन का फोन आया, उन्होंने कहा कि मैं आपसे मिलना चाहता हूं। उस समय मेरे मन की खुशी का दरवाजा खुल गया। ऐसा लगा कि जिस फादर को ढूंढ़ रहा था, वह तकदीर से मिल गया और जूही चावला भी इस तरह से साइन हो गईं। इसके बाद हमने ‘अंदाज’ कंप्लीट किया। इस तरह अक्षय के साथ हमारा एक रिश्ता बना और एक के बाद एक फिल्में हम साथ में करते चले गए। ‘अंदाज’ की खूबसूरती और कशिश ऐसी है कि आज भी मुझे मैसेज आते रहते हैं।

इस तरह ‘मेरे जीवन साथी’ से पहले ‘अंदाज’ की शूटिंग कंप्लीट कर ली गई

‘जानवर’ के बाद मैंने अक्षय कुमार के साथ कई फिल्में की हैं। लेकिन ‘अंदाज’ के पहले एक समय ऐसा आया, जब उनके साथ मैं फिल्म ‘मेरे जीवन साथी’ कर रहा था। फिल्म की आउटडोर शूटिंग अमेरिका में होनी थी, लेकिन किसी कारणवश मेटलाइजेशन नहीं हो पाया। फिर इंटरनेशनल परमीशन लेने में टाइम ज्यादा लग रहा था। उस समय अक्षय की डेट खाली हो गई थी। सोचा कि इन डेट का अब क्या किया जाए तो तुरंत फिल्म ‘अंदाज’ को प्लान किया गया। इसमें अक्षय और करिश्मा के अलावा एक और बड़ी हीरोइन को होना था, लेकिन प्रोजेक्ट की नॉवेल्टी नहीं बन पा रही थी। इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न हैंडसम हीरो के अपोजिट दो नई लड़िकयां कास्ट कर लूं। उस समय एक मैगजीन के कवर पर लारा दत्ता का फोटो देखा था। मैंने उनको बैंगलोर से बुलाया और फिर साइन किया। दूसरी लड़की कास्ट कर ही रहा था कि अपने सेक्रेटरी के साथ प्रियंका चोपड़ा मेरे ऑफिस में मिलने आ गईं। मैंने बोला कि ऊपर भेज दो, मिल लेते हैं। प्रियंका से मिलकर लगा कि अब तक करिश्मा, करीना कपूर, मीनाक्षी, जूही आदि जिन हीरोइनों के साथ काम किया वे अलग दर्जे की हीरोइन थीं और प्रियंका अलग हैं। मैंने उसी वक्त प्रियंका से बोला कि मैं तुम्हारे साथ काम करूंगा और ये तुम्हारा रोल है। इस तरह इंडस्ट्री को दो नई लड़कियां मिल गईं।

‘अंदाज’ से पहले डायरेक्टर राज कंवर का करियर डाउन था

‘अंदाज’ से पहले मेरे दोस्त डायरेक्टर राज कंवर का करियर भी डाउन चल रहा था। उन्होंने पहले कई सफल फिल्में बनाई थी, लेकिन अंदाज के पहले पांच-छह फिल्में नाकाम रही। वे हमेशा मुझसे कहते थे कि कभी आपके साथ काम करेंगे। मैंने कहा कि चलो, वह मौका आ गया है। उन्हें डायरेक्टर के तौर पर ले लिया। लेकिन मैंने कहा कि म्यूजिक डायरेक्टर उन्हीं को लूंगा, जिनके साथ पहले से काम करता आया हूं और वे नदीम-श्रवण थे, उन्होंने बेमिसाल काम किया।

‘अंदाज’ की रिलीज के समय इंडस्ट्री में आया था क्राइसिस

‘अंदाज’ की रिलीज के समय फिल्म इंडस्ट्री में थोड़ा क्राइसिस आ गया था, जिसके कारण फिल्म इंडस्ट्री में स्ट्राइक होने लगी थी। तब हालात बहुत नाजुक थे। मुझे याद है कि कई सिनेमाघर वाले फोन करके कहते थे कि ऐसा ही चलता रहा, तो हमें सिनेमाघर बंद करना पड़ेगा। मैंने रिक्वेस्ट किया कि अभी मत बंद कीजिए, एक बार मेरी फिल्म ‘अंदाज’ चला लीजिए, उसके बाद फैसला कर लीजिएगा। सिनेमाघर में ‘अंदाज’ लगने के बाद कलेक्शन आना शुरू हो गया और आडियंस वापस लौटकर सिनेमाघर आने लगी। इस तरह सिनेमाघर की स्थिति पटरी पर लौट आई।

‘अंदाज’ के सक्सेस में सबसे बड़ा कंट्रीब्यूशन इसके म्यूजिक का था

‘अंदाज’ एक अनोखी फिल्म बनाने की कोशिश की गई थी। इसे एक ट्रेडिशनल मोड में मॉर्डन प्रेजेंटेशन के साथ पेश किया गया था। फिल्म में कपड़े आज के पहने थे, पर आत्मा हिंदुस्तानी थी। फिल्म में दो नई लड़कियां थीं, एक मिस वर्ल्ड और दूसरी मिस यूनिवर्स। इससे पहले ये एक्टर नहीं रही थीं। इस पर लोग सोचने लगे थे कि कैसे फिल्म सफल होगी, क्योंकि इसमें तो एक नहीं, दो-दो नई लड़कियां थीं। लेकिन सबसे खूबसूरत बात यह थी कि प्रियंका चोपड़ा हिंदी फिल्म कैरियर के लिए 840 बोल्ट चार्ज थीं और लारा दत्ता की खूबसूरती यह थी कि वेस्टर्न क्वीन होने के बावजूद वो हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी आदि भाषाओं पर उनकी पकड़ बहुत अच्छी थी। लेकिन आखिर में, मैं कहूंगा कि ‘अंदाज’ के सुपर सक्सेस में सबसे बड़ा कंट्रीब्यूशन इसके सुपर सक्सेस म्यूजिक का था।

करिश्मा के साथ पांच-छह फिल्मों में काम किया है

अक्षय कुमार और करिश्मा कपूर, दोनों के साथ मेरे काम करने का अनोखा सफर रहा है। मैं करिश्मा के साथ काम कर चुका था। जब ‘जानवर’ बना रहा था, तब अक्षय का करियर काफी कमजोर था। एक एक्टर का करियर तब नहीं चलता, जब कोई भी कामयाब एक्टर और तकनीशियन उसका साथ नहीं देते। लेकिन उस वक्त मैंने करिश्मा से बात की, तब उन्होंने कहा कि मैं जरूर काम करूंगी। उसके बाद हमारा रिश्ता ऐसा बन गया कि जब मैं फिल्म ‘एक रिश्ता’ बना रहा था तब करिश्मा से पूछने की जरूरत ही नहीं पड़ी। फिर तो मैंने करिश्मा के साथ पांच-छह फिल्मों में काम किया।

पहले फिल्मेकर फैसला करते थे, अब फैसले एक्टर लेते हैं

यह मेरा सौभाग्य है कि 18 साल बाद भी मेरी फिल्म ‘अंदाज’ को याद किया जा रहा है। याद रखने का कारण यह है कि हम फिल्में बनाते थे, अब नए दौर के लोग कंटेंट बनाते हैं। इन बेचारों को कुछ बोल नहीं सकते, क्योंकि इनके ऊपर बैठे लोग चीजें डिसाइड करते हैं। दूसरी तरफ अधिकतर फैसले एक्टर लेते हैं। पहले फिल्मेकर फैसला करते थे, उसके बाद एक्टर आते थे। वक्त के साथ सिनेमा में जो चीजें बदली हैं, यह उसका असर है। सिनेमा के बदलते दौर के हालात को देखते हुए मैंने कदम खुद पीछे कर लिया है। लेकिन जिस दौर में मैंने 15-16 फिल्में बनाई थीं, उनमें लगभग फिल्में सफल रही थीं।

इसीलिए मैंने अपना कदम पीछे ले लिया

फिल्म ‘जानवर’ की कामयाबी के बाद अक्षय कुमार और मैंने फैसला किया था कि हम फिर साथ में काम करेंगे। उन्होंने एक दिन मुझे घर पर खाना खाने के लिए बुलाया और पूछने लगे कि इसके बाद क्या बनाना चाहते हैं। मैंने सोचा कि अब यह जानना चाहते हैं, आखिर क्या बताऊं! फिर मैंने अपने मन से उन्हें एक कहानी सुनाई। कहानी सुनकर अक्षय इतने प्रभावित हुए कि उत्सुकता भरे लहजे में पूछने लगे कि इसे कब शुरू करेंगे। मैं इसमें काम करना चाहता हूं, यह कहानी फिल्म ‘एक रिश्ता’ की थी। दरअसल, उन्होंने इससे पहले इस तरह की फिल्में नहीं की थीं। अधिकतर फिल्में अलग पैटर्न की होती थीं, जिसमें सिनेमैटिक काम कम और एक्शन ज्यादा होता था। खैर, कुल मिलाकर उस समय एक्टर-डायरेक्टर की दोस्ती, गुरू-शिष्य जैसे रिश्ता में होती थी और इस रिश्ते में खूबसूरत फिल्में बन जाती थीं। लेकिन एक प्वाइंट पर आकर फिल्म इंडस्ट्री में कार्पोटाइजेशन आया, जो अच्छी चीज थी। इससे इंडस्ट्री में पैसा आया, जो महंगे टेक्नोलॉजी की चीजें खरीदने और बड़े बजट की फिल्में बनाने की इजाजत देने लगा। लेकिन उसके साथ नए लोग भी आए उनको अनुमान नहीं था, तब उन्होंने अपने तरीके से नई इंडस्ट्री बसाई। इसीलिए मैंने खुद ही अपना कदम पीछे ले लिया। देखेंगे कि 2005 के पहले जो फिल्मेकर थे, उनको कहीं न कहीं बैकशीट लेना पड़ा। बदलते हालात के साथ समझौता करना आसान था, लेकिन कंप्रोमाइज नहीं कर पाया। जहां तक मैं समझता हूं, उस वक्त के मुट्‌ठीभर फिल्ममेकर ही आज कायम हैं जैसे- यशराज फिल्म्स, राकेश रोशन आदि अपने दम पर अपना सिनेमा बनाते रहे हैं।

नए फिल्मेकर के कंधे पर जरूरत से ज्यादा बोझ डाले गए

महबूब खान जैसे फिल्मेकर ने सिनेमा को लाजवाब बनाया है। वे सब यूनिवर्सिटी ऑफ सिनेमा से नहीं, बल्कि जिंदगी के सबक से पढ़े हुए लोग थे। फिर टेक्नोलॉजी सीखने के लिए यूनिवर्सिटी की जरूरत होती है। नए फिल्मेकर को अपनी जगह स्टैबलिश करने की पूरी इजाजत होनी चाहिए। लेकिन नए फिल्मेकर की सलाह ली गई और उनके कंधे पर जरूरत से ज्यादा बोझ डाले गए। उसका नतीजा आज सभी देख रहे हैं। मैं कहूंगा कि कॉर्पोरेट सिस्टम का कायम रहना बहुत जरूरी है। अगर वह कायम नहीं रहा, तब हमारी फाइनेंशियल स्ट्रैक्चरिंग जो है, उस पर असर पड़ेगा। लेकिन मेरा खयाल है कि उनका क्रिएटिव डिसीजन मेकिंग जो है, उसे अगर फिल्मेकर पर डाल दिया जाए, तब सिनेमा बहुत खूबसूरत हो जाएगा।

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