Blind Baba Suba Singh has taught 70 children Gurbani and Kirtan in 20 years | नेत्रहीन बाबा सूबा सिंह 20 साल में 70 बच्चों को सिखा चुके हैं गुरुवाणी और कीर्तन


बरनाला34 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
नारायणगढ़ सोहिया गांव के गुरुद्वारा चंदूआना साहिब में तबला वादन और शबद गायन सीखते बच्चे। - Dainik Bhaskar

नारायणगढ़ सोहिया गांव के गुरुद्वारा चंदूआना साहिब में तबला वादन और शबद गायन सीखते बच्चे।

  • गुरुद्वारा चंदुआना साहिब में 45 बच्चे ले रहे शिक्षा, इनमें ज्यादातर नेत्रहीन व शारीरिक रूप से कमजोर

नेत्रहीन और बेसहारा बच्चों को गुरुवाणी व कीर्तन सीखा कर नेत्रहीन बाबा सूबा सिंह उन्हें आर्थिक रूप से पैरों पर खड़ा कर रहे हैं। जिले के गांव नारायणगढ़ सोहिया के गुरुद्वारा चंदूआना साहिब में 45 बच्चे शिक्षा ले रहे हैं। इनमें से ज्यादातर नेत्रहीन और शारीरिक रूप से असमर्थ बच्चे हैं। बच्चे देश के विभिन्न इलाकों से आए हैं।

बाबा सूबा सिंह अब तक करीब 70 बच्चों को गुरुवाणी और कीर्तन सिखा चुके हैं। यह संस्था दानी सज्जनों और एनआरआई के सहयोग से चल रही है। गुरुद्वारा के चेयरमैन बलजीत सिंह ने बताया कि बाबा सूबा सिंह की देखरेख में 20 साल से संस्था चल रही है। उन्होंने बताया कि बाबा सूबा सिंह खुद देख नहीं सकते। वह शबद गायन, हार्मोनियम, तबला आदि बजाने में माहिर हैं और गुरुवाणी का ज्ञान है। आर्थिक कमजोर बच्चों की मदद करने के लिए संस्था शुरू की गई है।

नारायणगढ़ सोहिया के गुरुद्वारे में बच्चों की पढ़ाई के लिए भी रखे गए हैं टीचर

चेयरमैन बलजीत सिंह ने बताया कि उनके गुरुद्वारा में 45 बच्चे शब्द गायन सीख रहे हैं। इनमें से कई बच्चे नेत्रहीन है और कई शारीरिक रूप से असमर्थ हैं। कुछ बच्चे नॉर्मल हालात में भी हैं, जो बच्चे पूरी तरह से नॉर्मल है। उन्हें स्कूल में भर्ती करवाया गया है। स्कूल भी जाते हैं और उसके साथ शब्द गायन भी सीखते हैं। जो बच्चे नेत्रहीन व शरीर एक रूप से असमर्थ हैं। उनके लिए गुरुद्वारा में ही टीचर का प्रबंध किया गया है। जो ब्लाइंड लैंग्वेज से बच्चों को शिक्षा देते हैं। सभी बच्चों को एक साथ शिक्षा दी जाती है। बहुत से बच्चे यहां से शबद गायन सीख कर ग्रंथी और कीर्तन जत्थे के काम कर रहे हैं। वह लोगों को ज्ञान बांटने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी समर्थ हो रहे हैं।

दानी सज्जनों के सहयोग से हर माह सवा लाख रुपए बच्चों पर हो रहा खर्च

चेयरमैन बलजीत सिंह ने बताया कि दानी सज्जनों के सहयोग से हर महीने वह सवा लाख रुपए तक खर्च कर रहे हैं। इसमें गुरुद्वारे में लग रही क्लासों का रखरखाव, टीचर्स का वेतन बच्चों के कपड़े, रहने और खाने का प्रबंध इसके अलावा यहां बच्चे पढ़ते हैं। उनकी फीस आदि का प्रबंध किया जाता है। उन्होंने कहा कि संस्था को अगर कोई सहयोग करना चाहता है तो वह 98157-09877 पर संपर्क कर सकता है। इसके अलावा संस्था द्वारा किए हुए काम को गुरुद्वारे में आकर देखा भी जा सकता है। उन्होंने बताया कि संस्था को एनआरआई और दानी सज्जन पैसे देते हैं। जो प्रदेश के विभिन्न जिले से आए बच्चों पर खर्च किया जाता है। ताकि किसी भी बच्चे को कोई परेशानी न हो।

बेसहारा बच्चों को सहारा देना और काबिल बनाना संस्था का मकसद

बाबा सूबा सिंह ने कहा कि वह खुद देख नहीं सकते। लेकिन वह शबद गायन अच्छा कर लेते हैं। उनका जीवन का एक ही मकसद है कि वह बच्चों को काबिल बनाएं। जिससे वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके और बेसहारा बच्चे को किसी से भीख मांगने या किसी पर निर्भर रहने की जरूरत न रहे। उन्होंने बताया कि उनके सिखाएं हुए बच्चे बहुत जगह काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां से सीखे बच्चे कीर्तन और शबद गायन करते हैं।

खबरें और भी हैं…



Source link