China App | China collect data of Cambodia people from its Stop Covid-19 QR code contact tracing app system | कम्बोडिया में कोविड ट्रैसिंग ऐप के जरिए डेटा कलेक्ट कर रहा चीन, अमेरिकी संगठन की वॉर्निंग के बाद भी सरकार चुप


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नोम पेन्ह8 मिनट पहले

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दुनिया कोविड-19 के कहर से जूझ रही है और चीन इस मौके पर भी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। ताजा मामला कम्बोडिया का है। आरोप है कि चीन ने यहां की सरकार को ‘कोविड-19 ट्रैसिंग क्यूआर कोड कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग ऐप’ दिए और इनके जरिए कम्बोडियाई नागरिकों का प्राइवेट डेटा जुटा लिया। कम्बोडियाई को इसकी जानकारी अमेरिकी अधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ यानी HRW ने दी। हैरानी की बात यह है कि इस खुलासे के बाद भी कम्बोडिया की चीन परस्त सरकार इस मामले में कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

क्या था HRW की रिपोर्ट में
‘एशिया टाइम्स’ ने अपनी एक रिपोर्ट में HRW के हवाले से चीन की साजिश का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 6 अप्रैल को संगठन ने इस बारे में कम्बोडियाई सरकार को आगाह किया था। इसमें कहा गया था कि चीन इस ऐप के जरिए नागरिकों का न सिर्फ डेटा कलेक्ट कर रहा है, बल्कि जासूसी भी कर रहा है। संगठन ने चीन का नाम नहीं लिया था, लेकिन जो ऐप है, उसे चीन सरकार ने ही कम्बोडिया को सौंपा था। इतना ही नहीं चीन के एम्बेसेडर ने तब कम्बोडियाई अधिकारियों से मुलाकात की थी।

टूरिज्म का झांसा
रिपोर्ट के मुताबिक, कम्बोडिया में चीनी एम्बेसेडर ने तब कहा था कि डेटा कलेक्शन यह चेक करने के लिए है कि दोनों देशों के बीच कितने लोग यात्रा करते हैं। सच्चाई ये है कि महामारी में दूसरे देशों से आने वाले लोगों पर चीन ने रोक लगा रखी है। ऐप अपडेट करने की जिम्मेदारी उस हुबेई कंपनी को दी गई, जिसे दुनिया के ज्यादातर देशों में अब जासूसी के आरोप में एंट्री नहीं मिल रही।

आरोप तो यह भी है कि कम्बोडिया के चीन समर्थक प्राइम मिनिस्टर हुन सेन इस ऐप के जरिए अपने विरोधियों पर शिकंजा कस रहे हैं। दावा है कि दूसरे देशों से आने वाले टूरिस्ट की भी इसी ऐप के जरिए जासूसी की जा रही है।

सीक्रेट एग्रीमेंट
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, अमेरिकी जांच एजेंसियों को जुलाई 2019 में ही चीन की इन हरकतों की जानकारी मिल गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कम्बोडिया और चीन के बीच एक सीक्रेट एग्रीमेंट हुआ है। इसके तहत कम्बोडियाई सरकार अपना रीम नेवल बेस 30 साल के लिए चीन को सौंपने तैयार हो गई है। हैरानी की बात यह है कि 2010 से कम्बोडिया और अमेरिकी सैनिक कम्बाइंड मिलिट्री ड्रिल करते आए हैं। यह नेवी बेस अमेरिका ने ही तैयार किया था, लेकिन चीन अब इस पर नजरें जमाए है। थाईलैंड ने चीन को ज्यादा भाव नहीं दिया, इसलिए अब कम्बोडिया के जरिए वो जासूसी और सैन्य ताकत बढ़ाने की साजिश रच रहा है।

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