Corona test of teachers to be done in 2 days, 12 children will sit in one room, committee constituted for monitoring | 2 दिन में करवाने होंगे शिक्षकों के कोरोना टेस्ट, एक कमरे में बैठेंगे 12 बच्चे, मॉनिटरिंग के लिए कमेटी गठित


सिरसा18 घंटे पहले

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स्कूलों में सेनिटाइजेशन के बाद पड़ी कुर्सियां व डेस्क।

  • विभाग-सोमवार को 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए खुलेंगे स्कूल
  • अभिभावक बोले: जब तक कोरोना खत्म नहीं होता, तब तक नहीं भेजेंगे

कोरोना काल में 6 महीनों के बाद 21 सितंबर से स्कूल खुलेंगे। कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थी पठन-पाठन के संदर्भ में मार्गदर्शन एवं परामर्श के तौर पर स्कूलों को खोला जा रहा है। लेकिन रेगुलर क्लास नहीं लगेगी। विद्यार्थी स्कूल में बैग लेकर नहीं आएंगे। शिक्षा विभाग ने नो पेपर एक्सचेंज पॉलोसी के तहत स्कूलों को खोलने की अनुमति दी है। जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को स्कूल में किसी भी तरह का कागजी काम नहीं करा सकेंगे। स्कूल खोलने से पहले सरकारी व प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के कोरोना टेस्ट करवाने अनिवार्य किए गए हैं।

शिक्षा विभाग द्वारा कोरोना टेस्ट को लेकर स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया गया है। केंद्र सरकार ने 21 सितंबर से पूरे स्टॉफ के साथ सरकारी व गैर-सरकारी सभी हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल खोलने संबंधी गाइडलाइन भी जारी कर दी है। शिक्षा मुख्यालय द्वारा जिला शिक्षा विभाग के साथ स्कूल खोले जाने को लेकर वीडियो कान्फ्रेंसिंग की गई। स्कूल में अधिकतम 25 विद्यार्थियों को आने की अनुमति होगी। अगर स्कूल के अंदर बच्चों की भीड़ हो गई तो स्कूल संचालक जिम्मेदार होगा।

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने जो गाइडलाइन जारी की है उसे भी पालन करना होगा। 21 सितंबर से स्कूलों में कक्षाएं नहीं लगेगी, बल्कि विद्यार्थी विषय के बारे में जानकारी लेने के लिए आ सकते हैं। 21 सितंबर से पहले स्कूलों के सभी शिक्षकों समेत पूरे स्टॉफ को अनिवार्य तौर पर अपना कोरोना टेस्ट करवाना होगा। टेस्ट में पॉजिटिव आने वाले शिक्षक व कर्मचारी को स्कूल में आने की अनुमति नहीं होगी। जिला में 200 सीनियर सेकेंडरी स्कूल है, जबकि 150 के करीब प्राइवेट स्कूल।

ट्रांसपोर्ट-कैंटीन की नहीं मिलेगी सुविधा

सरकार की गाइडलाइन अनुसार 21 सितंबर से स्कूल खोलने के दौरान स्कूल वाहन चलाने की अनुमति नहीं होगी। विद्यार्थियों को अपने वाहनों से स्कूल आना होगा। विद्यार्थियों को कक्षा में बैठने के बाद उठाकर बाहर जाने का अनुमति नहीं होगी। पानी की बोतल साथ लेकर आनी होगी। जो विद्यार्थी पहले दिन जिस डेस्क पर बैठेगा, वह रोजाना उसी डेस्क पर बैठेगा। बच्चों के कक्षों को रोजाना दो बार सेनिटाइज करना होगा।

एंट्री व एक्जिट के लिए अलग-अलग होंगे गेट

21 सितंबर से स्कूल खोलने के निर्देश मिलने के बाद सरकारी व गैरसरकारी स्कूलों को सेनिटाइज करने का काम शुरू कर दिया गया है। कमरों, लैब, शौचालयों, मुख्य गेट को सेनिटाइज किया जा रहा है। विभाग द्वारा सेनेटाइजर, मास्क आदि के लिए बजट जारी किया गया है। बच्चों के एंट्री व एक्जिट के लिए अलग-अलग गेट लगाए जा रहे हैं। स्कूलों में बच्चों की भीड़ न हो इसके लिए एक कमरे में 12-12 स्टूडेंट्स ही बैठाए जाएंगे। ताकि सोशल डिस्टेसिंग बनी रही। स्कूल सुबह 9 से 12 बजे तक खुलेंगे।

अधिकतर स्कूलों में नहीं हुए कोरोना टेस्ट

स्कूल खुलने में 2 दिन का समय शेष है, लेकिन जिले में सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में अभी तक अधिकतर स्कूलों के शिक्षकों के कोरोना टेस्ट नहीं हुए हैं। जिलेभर में प्रतिदिन 1200 से 1500कोरोना के टेस्ट किए जा रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों को कोरोना टेस्ट करवाने का पत्र भी जारी किया जा चुका है। लेकिन कई स्कूलों के शिक्षक कोरोना टेस्ट करवाने से डर रहे हैं।

पेरेंट्स बोले: स्कूल खोलने का कोई औचित्य नहीं

स्कूल खोलने को लेकर अभिभावक सुमित्रा ने बताया कि उनकी बेटी 11वीं कक्षा में पढ़ी है। जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता, तब तक बेटी को स्कूल में नहीं भेजेंगे। क्योंकि अगर स्कूल में किसी एक बच्चे को कोरोना हुआ तो उसका कौन जिम्मेवार होगा। अभिभावक मोहन लाल ने कहा कि उनका बेटा 9वीं कक्षा में स्कूल में पढ़ता है। रोजाना बढ़ते कोरोना के केस को देखकर अब डर लगने लगा है। बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं कर सकते। अभिभावक राजरानी, कौशल्या व सुरेंद्र ने कहा कि वे अपने लाडलों को अभी स्कूल भेजने को तैयार नहीं हैं। इस हालत में अभी बाहर रोज स्कूल भेजना तो बिल्कुल भी सुरक्षा की दृष्टि से सही नहीं है। अभिभावक नरेंद्र, सोनू व पूनम ने बताया कि वे बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में हैं।

कोरोना काल में स्कूल खोलना संक्रमण फैलने की वजह बन सकता है

संक्रमण के दौरान सरकार स्कूल खोलने की तैयारियां कर रही है जिसके लिए 21 सितंबर की तिथि निर्धारित की है। पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सौरभ मेहता ने कहा कि कोरोना काल में स्कूल खोलने का कोई औचित्य नहीं है। अगर कोई भी बच्चा कोरोना पॉजिटिव पाया गया तो उसका कौन जिम्मेवार होगा। कोरोना के लक्ष्ण पाए जाने पर स्कूल के अन्य छात्रों में तेजी से संक्रमण बढ़ने के आसार हैं। ऐसे हालत में स्कूल नहीं खुलने चाहिएं। सरकार के पास कोरोना संक्रमण रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इस घड़ी में बच्चों को स्कूल भेजना उचित नहीं है।

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