Dogs sniffing at airports and events in many countries are detecting the corona virus. | कई देशों में विमानतलों और कार्यक्रमों में डॉग्स सूंघकर कोरोना वायरस का पता लगा रहे हैं


14 मिनट पहलेलेखक: जेम्स गोरमैन

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कुत्तों को मानवों की अलग- अलग गंध के लिए खास ट्रेनिंग देनी होगी। - Dainik Bhaskar

कुत्तों को मानवों की अलग- अलग गंध के लिए खास ट्रेनिंग देनी होगी।

  • चिकित्सा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उपयोग के मामले में कई बाधाएं

कई अध्ययनों से पता लगा है कि कुत्ते सूंघकर कोरोना वायरस का पता लगा लेते हैं। कुछ देशों के विमानतलों में कोविड-19 सूंघने वाले डॉग्स ने काम शुरू कर दिया है। अमेरिका में मियामी हीट बास्केटबॉल गेम सहित कई आयोजनों में इनका उपयोग हुआ है। लेकिन, कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ और ट्रेनर कहते हैं, वास्तविक स्थितियों में उनके सही होने के लिए अधिक जानकारी और तैयारी की जरूरत है।

पेनसिल्वानिया यूनिवर्सिटी में पेन वेट वर्किंग डॉग सेंटर के डायरेक्टर सिंथिया ओटो कहती हैं, सूंघने वाले कुत्तों के लिए कोई राष्ट्रीय मापदंड तय नहीं हैं। डिजास्टर मेडिसिन, पब्लिक हेल्थ प्रिपेयर्डनेस जर्नल में प्रकाशित नए रिसर्च पेपर के अनुसार हालांकि बम का पता लगाने और बचाव कार्यों में इस्तेमाल होने वाले कुत्तों का सर्टिफिकेशन होता है पर चिकित्सा से जुड़ी पहचान के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है।

दस्तावेज की लेखक जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में स्वास्थ्य रिसर्चर लुईस प्रिवोर डम का कहना है, कुत्तों के मेडिकल क्षेत्र में बहुत उपयोगी होने पर कोई संदेह या सवाल नहीं है। लेकिन सरकार द्वारा बड़े पैमाने उनकी तैनाती कैसे की जाएगी। यह कितना व्यावहारिक होगा। फिर खर्च की भी भूमिका होगी। खोजी कुत्तों की ट्रेनिंग और उनका रखरखाव बहुत खर्चीला है।

डॉ. ओटो कहती हैं, सूंघकर नशीली दवा या बम की खोज से अधिक पेचीदा किसी बीमारी की पहचान है। विमानतल पर ड्रग या बम खोजने वाले डॉग को लगातार यही काम करना पड़ता है। इन चीजों की गंध उसका सीधा लक्ष्य होता है। कोविड-19 के मामले में शोधकर्ता जानते हैं कि कुत्ते संक्रमित व्यक्ति के पसीने या पेशाब में अंतर कर सकते हैं। लेकिन, वे नहीं जानते कि डॉग ने किस केमिकल को पहचाना है। चूंकि मानवों की गंध में अंतर होता है इसलिए मेडिकल जांच करने वाले कुत्तों की ट्रेनिंग अलग-अलग लोगों के हिसाब से करना पड़ेगी।

कई बीमारियों के लक्षण कोविड-19 जैसे होते हैं। ऐसे में बुखार या निमोनिया से संबंधित गंध का पता लगाने वाले डॉग बेअसर साबित होंगे। डॉ. ओटो कहती हैं इसलिए कुत्तों के ट्रेनरों को कफ या बुखार वाले निगेटिव लोगों का ट्रेनिंग में इस्तेमाल करना चाहिए।

पीसीआर टेस्ट से बेहतर रिजल्ट

कुत्तों को बीमारी की पहचान के लिए पसीने, थूक या पेशाब की गंध पर प्रशिक्षित किया जा सकता है। संयुक्त अरब अमीरात में कुत्ते यूरिन के सैम्पल से पहचान करते हैं। मियामी में उन्हेें केवल लोगों की कतार के साथ घुमाया गया था। कुत्तों द्वारा पॉजिटिव बताए गए कोरोना संक्रमण की पीसीआर टेस्ट से पुष्टि हुई है। टेस्ट की तुलना में डॉग्स के रिजल्ट बेहतर रहे।

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