IIT has done the work of bringing Devanagari on the Internet before Google, work is going on in the plan to bring Hindi notes in the net, Kanpur | गूगल से पहले देवनागरी को इंटरनेट पर लाने का काम कर चुका है IIT, नेट में हिंदी नोट्स लाने की योजना में चल रहा है काम


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कानपुर22 मिनट पहले

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पिछले चार दशक से हिन्दी को बढ़ावा देने के लिये IIT कानपुर लगतार सफल कोशिशों में लगा हुआ है। गूगल से पहले इंटरनेट की दुनियां में हिन्दी को लाने का श्रेय भी इसी संस्थान को जाता है। वर्तमान में इंटरनेट की दुनियां में हिंदी की बेहतरी के लिये कई शोध पर कार्य चल रहा है। बहुत जल्द विकिपीडिया जर्नल्स आदि को हिंदी में करने की योजना बनाई जा चुकी है। स्टूडेंट्स और सीनियर्स के शोध को हिन्दी मे प्रस्तुत किये जाने की कोशिश रंग लाने वाली है।

सबके पहले IIT कानपुर ने शुरू किया हिन्दी पर काम

प्रो टीवी प्रभाकर (फैकल्टी कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट) ने बताया कि IIT कानपुर ने गूगल से पहले देवनागरी को इंटरनेट की दुनिया में पेश किया था। उस समय डॉ रजत मुना जो वर्तमान में भिलाई आईआईटी के निदेशक है। उनके साथ देवनागरी को लॉन्च किया था। इटरनेट पर हिंदी में कंटेंट बहुत कम है। IIT कानपुर के डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर हम लोगों इंटरनेट पर जैसे विकिपीडिया, जर्नल्स आदि को हिंदी करने की योजना बना रहे है। कंप्यूटर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डॉ अर्नब भट्टाचार्य इस प्रोजेक्ट को हेड हर रहे है।

हिंदी के ज्यादा इस्तेमाल पर दिया जा रहा है जोर

प्रो टीवी प्रभाकर ने बताया कि IIT कानपुर कैंपस में छात्रों को हिंदी में लिखने और अपने नोट्स बनाने के लिए मोटिवेट किया जा रहा है। छात्रों और सीनियर प्रोफेसर्स को साइंस और टेक्नोलॉजी के नोट्स और जर्नल्स को हिंदी में लिखने और इंटरनेट पर लोड करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही टेक्निकल राइटिंग को भी हिंदी में पेश करने का प्रयास किया जा रहा है।

हिन्दी में हो रहे परिवर्तन बेहतर संकेत है

प्रो टीवी प्रभाकर का कहना है कि हिंदी भाषा में हो रहा परिवर्तन अगली पीढ़ी के लिए अच्छा है। हिंदी सिर्फ 200 सालों पुरानी भाषा है, और जो हिंदी इस समय बोली जा रही है 200 सालों पहले ऐसी हिंदी नहीं हुआ करती थी। रामचरितमानस हिंदी में नहीं अवधि में लिखी गयी थी, इस लिहाज से अवधि को लोग भूल गए है। ऐसे में किसी भी भाषा मे परिवर्तन अच्छा संकेत माना जाता है। बिना परिवर्तन वाली तमाम भाषाएं आज इस दुनियां से खत्म हो चुकी है।

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