Laxman Singh’s wife said – I have experienced the pain of 370, if there was no home in Delhi, where would I have gone, what would have happened to those who did not have it | लक्ष्मणसिंह की पत्नी बोलीं- दिल्ली में घर न होता तो परिवार कहां जाता, किसी सरकार ने साथ नहीं दिया, किसी से गुस्सा नहीं.. बस पीड़ा है


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गुना3 मिनट पहलेलेखक: आशीष रघुवंशी

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कश्मीर में आर्टिकल 370 पर पुनर्विचार को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान पर बहू (छोटे भाई लक्ष्मण सिंह की पत्नी) रूबीना सिंह का दर्द छलका। रूबीना ने कहा कि आर्टिकल 370 का दर्द मैंने भोगा है, दिल्ली में घर नहीं होता तो कहां जाती, जिनका नहीं था, उनका क्या हुआ होगा? कांग्रेस को साफ करना चाहिए कि क्या वाकई 370 को लेकर उसकी पुनर्विचार की योजना है, जैसा कि कहा जा रहा है।

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने कहा था कि कांग्रेस की सरकार बनने पर धारा 370 पर पुनर्विचार किया जाएगा। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी सहित अपनो के निशाने पर आ गए हैं। भाजपा ने उन पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। newsjojo संवाददाता ने इस मामले में बयान पर आपत्ति जता रही लक्ष्मण सिंह की पत्नी रुबीना सिंह से चर्चा की तो उन्होंने अपनी बात रखी।

इस पूरे मसले पर आपका क्या कहना है?

जवाब – मुझे जो कहना था, वह मैं ट्वीट के जरिए कह चुकी हूं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कश्मीरी पंडितों को लेकर इस तरह की गैरजरूरी बात की जा रही हैं। यह बहुत पीड़ादायक है। मैं इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहती हूं। दरअसल कांग्रेस को सोचना चाहिए की ये क्या हो रहा है।

कश्मीरी पंडितों और उनके आरक्षण को लेकर आपकी क्या राय है?

जवाब- कश्मीरी पंडितों के आरक्षण को लेकर जो बात कही जा रही है, वह तार्किक रूप से ही गलत है। उनके लिए कोई आरक्षण कभी था ही नहीं। मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि इस विषय को क्यों लाया जा रहा है।

आर्टिकल 370 पर आपके क्या विचार हैं?

रूबीना सिंह- मैं यह कह सकती हूं कि अधिकतर कश्मीरी आर्टिकल 370 हटाने के निर्णय से खुश हैं। इसके लागू रहने के दौरान कश्मीरी पंडितों के साथी कैसा बर्ताव किया जाता था यह किसी से छुपा नहीं है। वे उस समय खुश नहीं थे। सरकारों ने उनके लिए कोई खास प्रयास नहीं किये। न ही कांग्रेस और न ही भाजपा ने कुछ किया। जैसा उनके (दिग्विजय सिंह) मामले में आया है कि कांग्रेस सत्ता में आने पर 370 पर पुनर्विचार करेगी, कांग्रेस को यह साफ़ करना चाहिए की क्या वाकई कोई ऐसी योजना है?

दिग्विजय सिंह के इस मामले को कैसे देखती हैं?

जवाब- वो मेरे जेठ हैं। हम इसे पारिवारिक मामला नहीं बनाना चाहते। लेकिन ये मेरी समझ से परे है कि वो इस मसले को क्यों उठा रहे हैं। वह भी एक पाकिस्तानी पत्रकार से। यह कतई सही नहीं है। कश्मीर पर ऐसा बयान जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। मैं उनसे इस मामले पर झगड़ा नहीं कर रही हूं। मैं केवल यह बताना चाह रही हूं कि यह कुछ ऐसा है जो गलत है। यह जो हुआ है वह अधिकतर कश्मीरी पंडितों को ठेस पहुंचा रहा है। लोकतंत्र में उन्हें अपनी बात रखने की पूरी आजादी है, पर हमें बहुत दुःख हुआ है।

आप कश्मीर से ताल्लुख रखती हैं?

जवाब- मैं मूल रूप से कश्मीरी हूं। मेरी मां कश्मीरी हैं। हमारे वहां दो घर थे। एक श्रीनगर में और एक गुलमर्ग में। जब यह समस्या (कश्मीरी पंडितों वाली) शुरू हुई, उस दौरान हमने अपने दोनों घर खो दिए। हमें वह घर छोड़कर दिल्ली आना पड़ा। किसी भी सरकार ने हमारी न ही चिंता की और न ही मदद की। न ही इन सब नुकसानों की भरपाई की। भारतीय जनता पार्टी ने भी कोई मदद नहीं की। ये एकदम साफ़ है कि कश्मीरी पंडितों की किसी ने भी सहायता नहीं की। यह वास्तव में बहुत पीड़ादायक था। जब हमने उस भयानक दौर के बाद जीवन पुनः शुरू करना चाहा तब कहीं से किसी प्रकार की मदद नहीं मिली। अगर हमारे पास दिल्ली में घर नहीं होता तो हम लोगों का क्या होता। हमारे पास तो व्यवस्था थी तो हम दिल्ली चले आए उनका क्या हाल हुआ होगा जिनके पास कुछ था ही नहीं।

अब फिर से यह मुद्दा सामने आया है, इसे किस प्रकार देखा जाना चाहिए?

जवाब- मैंने वो ट्वीट गुस्से में नहीं किया है, वो मेरी पीड़ा है। जिस देश से हम लड़ रहे हैं, उसी देश के पत्रकार के सामने हमें जलील किया जा रहा है। यह गलत है। कई कांग्रेस के नेता भी आर्टिकल 370 को लेकर इसी तरह की बात कहते आएं हैं। समस्या यह है कि अधिकतर भारतीयों ने कश्मीरियों को भारतीय माना ही नहीं। सरकार को कश्मीर को जरूरी मुद्दा बनाना चाहिए। क्योंकि अभी कश्मीर की बात है। अगर कश्मीर के लोग उधर चले गए तो वे फिर पंजाब के लिए आएंगे। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी जमीन पर पकड़ बनाये रखें। यह हमारी जमीन है।

सरकारों का क्या रवैया रहा है?

अधिकतर सरकारों ने वहां की जनता के साथ छल किया है। अब्दुल्ला परिवार ने कश्मीर के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने सीमा पार के लोगों तक भारत अधिकृत कश्मीर में बसाया ताकि उन्हें चुनाव में फ़ायदा मिल सके। इसी वजह से वहां हिन्दुओं को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया है। उसके बाद सभी सरकारों ने भी अपने चुनावी फायदे के लिए ही कश्मीरियों का उपयोग किया है। आरक्षण की बात कही जा रही है, यहां गलत है। हमें कुछ नहीं दिया गया। हमने अपनी जंग खुद से लड़ी है।

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