Lost hearing ability at the age of 5, completed his studies while battling diseases, curiosity cleared RAS men in the first attempt | 5 साल की उम्र में सुनने की क्षमता गंवाई, बीमारियों से जूझते हुए पढ़ाई पूरी की, पहले प्रयास में आरएएस मेन्स क्लीयर किया जिज्ञासा ने


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काेटा27 मिनट पहले

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  • काेटा की बेटी की उपलब्धि, 80 फीसदी सुनाई नहीं देता, साेशल मीडिया के जरिए करती हैं बात

मन में लगन हाे और कुछ करने की हाैसला हाे आगे बढ़ने से काेई राेक नहीं सकता। ऐसी की कुछ दस्तान है काेटा की बेटी जिज्ञासा शर्मा की। जिज्ञासा काे सुनाई नहीं देता है। इसके अलावा वे बचपन से ही कई बीमारियाें से जूझती रहीं। इसके बावजूद उन्हाेंने ने हार नहीं मानी और हाल में ही उन्हाेंने विशेष कैटेगरी में आरएएस मेन्स क्लीयर किया है।

जिज्ञासा कक्षा 5 में थीं जब दवा के रिएक्शन से कम सुनाई देने लगा था। बीच में आर्थराइटिस भी हाे गया। हालत ये हाे गई कि वे ठीक से खड़ी भी नहीं हाे सकती थीं। उसके बाद भी उन्हाेंने हार नहीं और फिजियाेथेरेपिस्ट बनीं। इसके बाद आरएएस की तैयारी शुरू की और बिना काेचिंग ज्वाॅइन किए पहले ही प्रयास में मेन्स क्लीयर कर लिया।  जिज्ञासा के पिता सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि बेटी पांचवीं में थी तब दवा के रिएक्शन से दोनों कानों से सुनने में परेशानी हाेने लगी। काफी इलाज करवाया, लेकिन इसका समाधान नहीं हुआ है। अभी भी दाेनाें कानाें में मशीन लगी हुई है। हियरिंग डिसएबिलिटी के कारण काफी समस्या आई। इसी दाैरान गठिया भी हाे गया। बीमारी इतनी गंभीर हाे गई कि वाे बिना सहारे के चल भी नहीं सकती थी। इसके बावजूद उसके हाैसले में कभी कमी नहीं आई। उसने कक्षा 10 में 88 और 12वीं में 79 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए। इसके बाद फिजिथैरेपी की डिग्री पूरी की।  

परिवार को भी नहीं थी जिज्ञासा के सफल होने की उम्मीद
जिज्ञासा काे बात करने के लिए साेशल मीडिया का सहारा लेती हैं। पिता ने बताया कि उन्हें भी यकीन नहीं था कि उनकी बेटी काे ऐसी सफलता मिलेगी। हालांकि उसकी हिम्मत और मेहनत में काेई कमी नहीं थी। इसलिए परिवार वाले भी उसका बखूबी साथ देते थे।

उसने अपनी सारी परेशानियाें काे मात देकर यह सफलता हासिल की है। जिज्ञासा शर्मा ने बताया कि यदि आरएएस में सलेक्शन हाे जाता है ताे समाज के वंचिताें के लिए हर संभव कार्य करेंगी। सरकार की ओर से निशक्तजनाें की याेजनाओं काे उन तक पहुंचाना भी मकसद रहेगा। अभी वे इंटरव्यू की तैयारी में जुट गईं हैं।

नाैकरी के बाद बचे समय में करती थी पढ़ाई
सूर्यकांत बताते हैं कि जिज्ञासा फिजियाेथैरिपिस्ट बन गईं ताे उन्हें लगा कि समाज के लिए कुछ करना है। इसके बाद आरएएस की तैयारी शुरू की। नाैकरी के बाद बचे हुए टाइम में वाे पढ़ाई करती थी। तैयारी के लिए काेई काेचिंग नहीं ज्वाॅइन की। पढ़ाई के लिए नाेट्स तैयार करने में भाई डाॅ. गाैरव शर्मा पूरा सपाेर्ट करते थे। मां अनुपमा शर्मा भी पूरी रात जगती थीं, ताकि बेटी का पढ़ाई में मन लगा रहे। 

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