Meghna Malik said – When the sound of light, camera, action falls in the ears, then there is relief | मेघना मलिक बोलीं- लाइट, कैमरा, एक्शन की आवाज जब कानों में पड़ती है, तब सुकून मिलता है


26 मिनट पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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‘अंग्रेजी मीडियम’, ‘पगलैट’, ‘साइना’ आदि फिल्मों के बाद मेघना मलिक की ‘अनफेयर एंड लवली’, ‘सहर’, ‘उमा’ फिल्म सहित वेब सीरीज ‘आरण्यक’ आने वाली हैं। मेघना इन दिनों कोलकाता में फिल्म ‘उमा’ की शूटिंग कर रही हैं। इसमें काजल अग्रवाल, टीनू आनंद आदि कलाकार हैं। पेरेंट्स डे यानी 25 जुलाई को फिल्म ‘साइना’ का प्रीमियर जी सिनेमा पर होने जा रहा है। चूंकि साइना के करियर में उनकी मां का बहुत बड़ा योगदान रहा है, इसलिए इस फिल्म को पैरेंट्स डे पर वर्ल्ड प्रीमियर करने का प्लान किया गया है। newsjojo से खास बातचीत में मेघना ने ‘साइना’, ‘उमा’ सहित अपनी अन्य फिल्मों के बारे में बात की और बताया कि जब उनके कानों में लाइट, कैमरा, एक्शन की आवाज पड़ती है, तब उन्हें सुकून मिलता है।

Q.फिल्म ‘साइना’ में मां के रोल के लिए आपको बड़ी सराहना मिली। इस रोल को आप किस तरह से अपने दिल के करीब मानती हैं?
A.हां, इसके लिए मुझे काफी सराहना मिली। मैंने जिन लोगों के साथ सालों पहले काम किया था, उन्होंने फिल्म देखकर मुझे फोन किया। एक किस्सा ऐसा हुआ कि एक आर्मी ऑफिसर ने मुझे कॉल करके कहा, ‘आपका किरदार मेरी वाइफ और मेरी बेटी को बहुत अच्छा लगा। बताना चाहूंगा कि फिल्म में पिता जो अपनी बेटी के लिए करना चाह रहा था, उसमें मां कहीं न कहीं हिचक रही थी। यह फिल्म देखने के बाद मेरी पत्नी ने मुझे फोन करके कहा कि मैं माफी चाहूंगी, क्योंकि उस वक्त आपकी भावनाओं को पूरी तरह से समझ नहीं पाई थी। यह फिल्म देखकर हमारे रास्ते एक हो गए। हमारे बीच का मनमुटाव दूर हो गया।’ इस तरह बच्चों के मां-बाप, मेरे किरदार में अपने आपको ढूंढ़ रहे थे, यह घर-घर की कहानी हो गई थी। एक बड़ी खूबसूरत बात यह रही कि जब फिल्म नेहवाल परिवार ने देखी, तब मेरी हरविंदर और उषा जी से बात हुई। उन्होंने मुझसे फोन पर कहा कि ऐसा लगा कि मैं खुद ही फ्रेम में बैठी हूं। यह सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा।

Q.सेट पर परिणीति चोपड़ा के साथ फन या मस्ती किस तरह की होती थी?
A.पहले दिन हिचक सी थी कि मैं एक स्टार के साथ काम करने जा रही हूं। मैं परिणीति को पहले से जानती नहीं थी तो तालमेल बिठाने में हिचक रही थी। लेकिन पहली मुलाकात में मैं उनसे इस कदर घुल-मिल गई कि हमारे बीच अच्छा तालमेल बन गया। परिणीति बड़ी तैयारी करके सेट पर आती थीं। इसके बावजूद जब मां के एक्सीडेंट का सीन शूट हो रहा था, तब परिणीति सहित हम सब बहुत प्रेशर में थे, क्योंकि बारिश की संभावना और लाइट जाने वाली थी। उसमें परिणीति का पूरा इमोशन निखरकर आना था, मैं खून में लथपथ कब तक नीचे पड़ी रहूंगी, खराब मौसम और ऊपर से डेडलाइन का प्रेशर हो गया था, क्योंकि उस दिन लोकेशन पर शूट करने का लास्ट दिन था। अगर सीन ओके नहीं होता, तब अगले दिन का परमीशन भी नहीं था। दूसरा, एक आइसक्रीम खाने का सीन था। उसे करते-करते आखिर तक आइसक्रीम ही पिघल जाती थी। उसके कई रीटेक हुए, इस चक्कर में परिणीति और मैंने पता नहीं कितने चम्मच आइसक्रीम खाई।

Q.‘उमा’ की शूटिंग शुरू कर दी है। पहले दिन का एक्सपीरियंस कैसा रहा?
A.‘उमा’ की शूटिंग हाल में ही शुरू हुई है। हम कोलकाता में शूट कर रहे हैं। जिस तरह फिल्मों का 35-40 दिनों का शेड्यूल होता है, उसी तरह इसका भी है। यह एक परिवार की कहानी है। परिवार के बीच कहीं सहमति तो कहीं असहमति होती है। एक ट्विस्ट है, जहां कोई बात सुलझानी है, तब परिवार बिखरता या जुड़ता है। कहानी में इसी का ताना-बाना है। इसमें काजल अग्रवाल, टीनू आनंद, हर्ष छाया और मैं हूं। लॉकडाउन के चलते मैं कई महीनों बाद शूट करने आई हूं। जब लाइट, कैमरा, एक्शन की आवाज कानों में पड़ती है, तब ऐसा लगता है कि आह! बहुत सुकून देने वाला होता है। पहले दिन की शूटिंग अच्छे से पूरी हुई। गनीमत इतनी रही कि बारिश नहीं हुई, पर गर्मी इतनी थी कि सिर से लेकर पैरों तक पसीने में तर-ब-तर था। फिर भी हम बहुत दिनों बाद शूट कर रहे थे, इसलिए बहुत जोश था। मेरा और हर्ष का यह पहला शॉट था।

Q.आप अपने किरदार के बारे में बताइए?
A.फिल्म में मेरा किरदार बहुत सुलझी हुई महिला का है। वो अपने पति की खुशी और बच्चों की परवरिश के लिए अपने आपको न्यौछावर कर देती है। वो परिवारिक जिम्मेदारी के बीच खुद को भूल जाती है। उसकी जर्नी एक रास्ते पर आ पहुंचती है, जहां उसको लगता है कि यह क्या हुआ। वो मॉडर्न महिला होते हुए एक पड़ाव पर आती है, जहां उसे लगता है कि वह खो गई है। जब उसकी नैया डगमगाने लगती है, तब वो अपने आपको थामती है। वह अपने आपको ढूंढ़ती है, यह मेरे किरदार की जर्नी है। बाकी कहानी में परिवार के लोग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

Q.‘मिर्जापुर 3’ सहित आपके कौन से प्रोजेक्ट आने वाले हैं। उनमें आपका किरदार कैसा है?
A.अभी तो ‘मिर्जापुर 3’ के बारे में कुछ बताया नहीं गया। लॉकडाउन की वजह से अभी उस पर काम चल रहा होगा। अभी ओटीटी पर आने वाली एक वेब सीरीज है, जिसका नाम ‘आरण्यक’ है। इसमें मैं, रवीना टंडन, आशुतोष राणा, जाकिर हुसैन आदि कलाकार हैं। मेरा पॉलिटिशियन का एक इंटरेस्टिंग किरदार है। इसका पैच वर्क चल रहा है। यह इसी साल आएगी। इसकी शूटिंग के समय की मजेदार बात यह थी कि हिमाचल में हम सब -3 डिग्री में शूट कर रहे थे। सभी कई लेयर कपड़े पहने हुए थे। बर्फ में शूटिंग करते हुए हमारे हाथ पांव ठंड से ठिठुर जाते थे। इसकी शूटिंग हिमाचल में हुई है और उसी शहर की कहानी है। वहां के हादसों और किस्सों पर बनी यह सीरीज थ्रिलर जॉनर की है। इसके अलावा एक फिल्म ‘अनफेयर एंड लवली’ की है। इसमें रणदीप हुड्‌डा, इलियाना डिक्रूज हैं। कॉमेडी जॉनर की यह फिल्म बनकर तैयार है। मेरा किरदार एक झल्ली टाइप का है, जिसका परिवार में कुछ चलता नहीं। एक फिल्म यशपाल शर्मा के डायरेक्शन में हरियाणा के फोक आर्टिस्ट दादा लख्मीचंद पर की है। यह फिल्म फेस्टिवल राउंड में है। मेरा लख्मीचंद की मदर का रोल है। एक फिल्म शहर की है। यह लखनऊ, उत्तर प्रदेश की जुबान के ऊपर बनी है। इसका कोई धर्म नहीं होता है। भाषाएं जो छूटती जा रही हैं, उसे समेट कर रखने के ऊपर है। इसमें मेरा पंकज कपूर की वाइफ का किरदार है, जो उर्दू अखबार में एडीटर है। एक और फिल्म है, जो लॉकडाउन की वजह से बीच में अटक गई है। वो जब पूरी होगी, तब बता पाऊंगी।

Q.कुछ सालों से आप ‘अंग्रेजी मीडियम’, ‘पगलैट’, ‘साइना’ जैसी तमाम फिल्में और सीरीज कर रही हैं। क्या आपको टेलीविजन की कहानियां फीकी लगने लगी हैं?
A.देखिए, आज मैं जो भी हूं, वो टेलीविजन की वजह से ही हूं। उसने मुझे खूबसूरत पड़ाव पर लाकर खड़ा किया है, उसकी वजह से मुझे एक पहचान मिली है और लोगों का प्यार भी मिला है। अम्मा जी का किरदार दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग पर छा गया। टेलीविजन बहुत समय लेता है। जबकि मेरा मन था कि थिएटर, फिल्म और सीरीज भी करूं। फिल्में और सीरीज स्टार्ट टु फिनिश होती हैं। दूसरी बात यह भी है कि टेलीविजन में इतना दोहराव हो जाता है, जिससे कि रोल चैलेंजिंग नहीं लगता है। आगे देखती हूं कि अगर कोई चैलेंजिंग रोल मिला तो जरूर करूंगी।

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