Petrol Diesel Prices And Crude Rates; Narendra Modi Government Not Taken Advantage Of Cheap Oil | कच्चा तेल सस्ता होने पर भी कम नहीं हो रहे पेट्रोल-डीजल दाम, मोदी सरकार ने बीते 7 सालों में नहीं दिया सस्ते तेल का फायदा


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नई दिल्ली3 मिनट पहले

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77 डॉलर तक पहुंचने के बाद अब कच्चा तेल एक बार फिर 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है। बीते 2-3 दिनों से कच्चा तेल 70 के नीचे ही चल रहा है लेकिन सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी नहीं की है। मोदी सरकार में जनता को कच्चे तेल के सस्ता होने का फायदा नहीं मिला है। मोदी सरकार जब सस्ता में आई थी तक कच्चा तेल 107 डॉलर प्रति बैरल पर था।

मोदी सरकार में पेट्रोल का बेस प्राइज कम हुआ फिर भी इसकी कीमत बढ़ी

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के अनुसार मई 2014 में जब मोदी सरकार सस्ता में आई थी तब पेट्रोल का बेस प्राइस 47.12 रुपए था, जो जुलाई में 2021 घटकर 41 रुपए रह गया। यानी इसमें गिरावट आई। इसके बावजूद भी आज पेट्रोल की कीमतें 43% तक बढ़ चुकी हैं। मई 2014 में दिल्ली में पेट्रोल 71.41 रुपए पर था जो अब 101.84 रुपए प्रतिलीटर पर पहुंच गया है। बेस प्राइस वो होता है जिस पर

भारी टैक्स वसूली के कारण बढ़े दाम
अब आपके मन में सवाल आ रहा होगी की जब मोदी सरकार में बेस प्राइज कम हुआ है तो पेट्रोल-डीजल महंगे कैसे हो गए। इसका कारण है पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स में बढ़ोतरी। मई 2014 से लेकर अब तक 13 बार पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी की गई है।

केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी के जरिए टैक्स लेती है। मई 2014 में जब मोदी सरकार आई थी, तब केंद्र सरकार एक लीटर पेट्रोल पर 10.38 रुपए और डीजल पर 4.52 रुपए टैक्स वसूलती थी। मोदी सरकार में 13 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है, लेकिन घटी सिर्फ तीन बार। आखिरी बार मई 2020 में एक्साइज ड्यूटी बढ़ी थी। इस वक्त एक लीटर पेट्रोल पर 32.98 रुपए और डीजल पर 31.83 रुपए एक्साइज ड्यूटी लगती है। मोदी के आने के बाद केंद्र सरकार पेट्रोल पर तीन गुना और डीजल पर 7 गुना टैक्स बढ़ा चुकी है।

टैक्स के बाद 3 गुना महंगे हो जाते हैं पेट्रोल-डीजल
देश में पेट्रोल का बेस प्राइज 41 और डीजल का 42 रुपए है। लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से लगने वाले टैक्स से इनकी कीमतें देश के हिस्सों में 110 रुपए के पार पहुंच गई हैं। केंद्र सरकार 33 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। इसके बाद राज्य सरकारें इस पर अपने हिसाब से वैट और सेस वसूलती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल का दाम बेस प्राइज से 3 गुना तक बढ़ गया है। भारत में पेट्रोल पर 55 और डीजल पर 44 रुपए से भी ज्यादा टैक्स वसूला जाता है।

एक्साइज ड्यूटी से सरकार की कमाई 6 सालों में 3 गुना हुई
2014 में मोदी सरकार आने के बाद वित्त वर्ष 2014-15 में पेट्रोलियम प्रोडक्ट पर एक्साइज ड्यूटी से 1.72 लाख रुपए की कमाई हुई थी। 2020-21 में यह आंकड़ा 4.54 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। यानी सिर्फ 6 सालों में ही एक्साइज ड्यूटी से केंद्र सरकार की कमाई 3 गुना हुई। वहीं राज्यों को पेट्रोल-डीजल पर वैट लगाने से होने वाली कमाई 5 साल में 43% बढ़ी है।

वित्त वर्ष 2014-15 में इससे होने वाली कमाई 1.37 लाख करोड़ थी जो 2020-21 में बढ़कर 2.03 लाख करोड़ पर पहुंच गई। कोरोना की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के बावजूद भी सरकार ने पेट्रोल- डीजल पर भारी टैक्स वसूलकर अपना खजाना भरा है।

GST के दायरे में नहीं आएंगे पेट्रोल और डीजल
सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल GST के दायरे में नहीं आएंगे। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने लोकसभा में सोमवार को कहा कि, अभी तक GST काउंसिल ने तेल और गैस को GST के दायरे में लाने के लिए कोई सिफारिश नहीं की है।

SBI के अर्थशास्त्रियों की तरफ से आई रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल और डीजल GST तो देश में पेट्रोल की कीमत 81 रुपए और डीजल की कीमत 74 रुपए प्रति लीटर पर आ सकती है। इसका मतलब यह है कि पेट्रोल 15 से 30 रुपए प्रति लीटर और डीजल 10 से 20 रुपए प्रति लीटर तक सस्ता हो जाएगा। अगर इन्हें GST के दायरे में लाते तो कच्चे तेल की कीमतों के हिसाब से पेट्रोल और डीजल की कीमतें रहतीं।

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