Success Story Of IAS Topper Srushti Jayant Deshmukh


अपने पहले ही प्रयास में पांचवी रैंक लाने वाली सृष्टि जयंत देशमुख ने महिला उम्मीदवारों में टॉप किया था और साल 2018 में इंजीनियरिंग और यूपीएससी परीक्षा एक साथ पास की, आइये जानते हैं कैसे किया उन्होंने ये कारनामा

Success Story Of IAS Srushti Jayant Deshmukh: सृष्टि जयंत देशमुख भोपाल, मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उनकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा यही हुई है. सृष्टि बाकी बच्चों की तुलना में इस मामले में अलग थीं कि उन्होंने बचपन में ही सोच लिया था कि उन्हें बड़े होकर आईएएस ऑफिसर बनना है. उस उम्र में जब बच्चे खेल-कूद में ही मन लगाते हैं, सृष्टि आईएएस सेवा में मन लगा चुकी थीं. उन्हें तब इतनी भी समझ नहीं थी कि इस सपने को पूरा करने के लिये किस स्तर की मेहनत चाहिये और किस लेवल के कांपटीशन को बीट करना पड़ सकता है. कमाल की बात तो यह है कि सृष्टि ने समझ आने के बाद भी कभी ये नहीं सोचा. वे कभी अपने दिमाग में लायी ही नहीं कि यह बहुत कठिन परीक्षा है, कि इसमें लाखों लोग बैठते हैं. उन्होंने हमेशा सकारात्मक सोच के साथ बस अपने दिल की सुनी और पूरी ईमानदारी से प्रयास किया.

निगेटिव लोगों से रहें दूर –

अपने सफर के बारे में बात करते हुये सृष्टि ने एक साक्षात्कार में बताया कि इस बात का आपके मोटिवेशन और तैयारी पर बड़ा असर पड़ता है कि आप किन लोगों से घिरे रहते हैं. उन्होंने काफी साफ शब्दों में कहा कि निगिटेव लोगों से दूर न हों, उन्हें अपने जीवन से ही हटा दें. ये एनर्जी सकर्स होते हैं जो आपको कदम-कदम पर रोकेंगे. आपको कहेंगे कि यह आपसे नहीं होगा. ऐसी बातों का दिमाग पर कई बार गहरा असर होता है, जिसका प्रभाव सफलता पर पड़ता है. क्योंकि एक बार दिल ने मान लिया कि आपसे नहीं होगा तो कितनी भी मेहनत कर लो सच में आपसे नहीं होगा.

इंजीनियरिंग के साथ की तैयारी –

सृष्टि बताती हैं कि इंजीनियरिंग के तीसरे साल में एक दिन उन्हें यह ख्याल आया कि वे इंजीनियर बनकर एक सिंपल नौकरी के साथ पूरा जीवन नहीं बिता सकती. बचपन का उनका सपना जो जिंदगी की भागदौड़ में कहीं खो गया था अब उस पर वापस आने का वक्त आ चुका था. सृष्टि ने तुरंत एक्शन लिया और जुट गयीं यूपीएससी की तैयारी में. इसमें वे अपने परिवार के सहयोग का जिक्र करना भी नहीं भूलती. वे कहती हैं कि उनके घर से उन्हें बहुत मदद मिली. मां, जोकि एक टीचर हैं ने कभी नहीं पूछा कि क्या कर रही हो, क्यों कर रही हो या कैसे होगा, केवल उनका साथ दिया. पिता, जोकि इंजीनियर थे उन्होंने भी सृष्टि को हमेशा एक हेल्दी एनवायरमेंट देने की कोशिश की. सृष्टि का एक छोटा भाई भी है जो हमेशा उनके हल्के-फुल्के पलों में शामिल रहा. इस प्रकार अपने ऊपर अटूट विश्वास के साथ सृष्टि ने दिन-रात एक करके तैयारी करना शुरू कर दिया.

दो नावों पर की सवारी  –

सृष्टि का मुख्य फोकस हमेशा से यूपीएससी की परीक्षा थी. वे अपना अधिकतम समय और एनर्जी इसी की तैयारी में लगाती थी. जब इंजीनियरिंग के सेमेस्टर एग्जाम पास आ जाते थे तो वे एक से डेढ़ महीने इसकी पढ़ाई करने लगती थी. यहां काबिले-तारीफ बात यह है कि जहां कुछ कैंडिडेट एक बार में एक भी परीक्षा पास नहीं कर पाते, वहीं सृष्टि एक साथ दो नावों की सवारी कर रही थी. पर कमाल का था सृष्टि का बैलेंस की दो नावों में पैर रखने के बावजूद सृष्टि डूबी नहीं बल्कि ऐसा तैरी जैसा लाखों का सपना होता है. जरा सोचिये की यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा के बीच-बीच में इंजीनियरिंग को भी समय देना कितना कठिन होगा. कितना डेडिकेशन, अनुशासन और हार्डवर्क किया होगा उन्होंने जो मंजिल तक पहुंच पायी.

सोशल मीडिया से दूरी और योग से नजदीकी काम आयी –

सृष्टि कहती हैं मेहतन सभी करते हैं लेकिन फर्क डालता है हर कैंडिडेट का मेंटल लेवल. जिसका दिमाग जितना शांत और सही दिशा में है उसे उतना ही फायदा मिलता है. अपनी ऊर्जा को सही दिशा में खर्च करना आवश्यक है. एक साथ दो-दो विषयों की पढ़ाई करते समय सृष्टि को बैलेंस बनाने में मदद की योगा और मेडिटेशन ने. वे फिजिकल और मेंटल फिटनेस को सफलता के लिये बहुत आवश्यक मानती हैं. इसके अलावा वे दो टिप्स देती हैं. वे कहती हैं सिविल सर्विसेस की तैयारी में कंसिसटेंसी और फेथ बहुत जरूरी है. ऐसा न करें कि एक दिन सात-आठ घंटे पढ़ लिया फिर अगले दिन दो घंटे पढ़ा या स्किप कर दिया. जितने भी घंटे अपनी क्षमता के अनुसार आप फिक्स करें, उतने घंटे रोज़ पढ़ें, इसी कंसिसटेंसी की जरूरत होती है और दूसरी अहम बात कोई कुछ भी कहे अपने ऊपर विश्वास रखें.

सृष्टि ने खुद का ध्यान भटकने से बचाने के लिये तैयारी की शुरुआत करने से पहले ही सोशल मीडिया एकाउंट्स डिलीट कर दिये थे. उन्होंने ऑनलाइन स्टडी मैटीरियल का अत्यधिक उपयोग किया इसलिये खुद को डिस्ट्रैक्ट होने से बचाने के लिये सृष्टि ने यह कदम उठाया.

लाखों से नहीं है कांपटीशन –

सृष्टि कहती हैं कि इस परीक्षा की तैयारी करते समय दो बातों को दिमाग में बैठा लें. एक तो यह कि कैंडिडेट्स को अक्सर लगता है कि कांपटीशन तगड़ा है, लाखों स्टूडेंट्स परीक्षा में बैठते हैं तो, एक बात जान लीजिये कि जो लाखों स्टूडेंट्स परीक्षा में बैठते हैं, वे सब परीक्षा को लेकर गंभीर नहीं होते. उनमें से जितने गंभीरता से परीक्षा दे रहे हैं, केवल उन्हीं से आपका कांपटीशन है तो सबसे पहले आंकड़ों से डरना बंद कर दें. दूसरी बात यह ध्यान रखें कि अपने मन को यह समझा दें कि मेरा पहला अटेम्पट ही आखिरी है. अब आगे मौका नहीं मिलेगा. परीक्षा का स्तर देखने या परीक्षा को समझने के लिहाज से एग्जाम में न बैठें. ऐसे तैयारी करें और ऐसे परीक्षा दें जैसे बस यही पहला और आखिरी मौका है, इसी में सफलता हासिल करनी है. ये जरूर कर सकते हैं कि तैयारी में अच्छा समय दें और जब संतुष्ट हों अपनी तैयारियों से तभी परीक्षा देने जायें. साल 2018 में सृष्टि ने इंजीनियरिंग भी पास की और ऑल इंडिया रैंक 05 के साथ ही यूपीएससी परीक्षा भी. महिलाओं में उन्होंने टॉप किया था. सृष्टि का सफर यह बताता है कि शांत मन और डर को दूर भगाकर अगर पूरी एकाग्रता से कोशिश की जाये तो तय पैमानों से जुदा कदम उठाने पर भी सफलता हासिल की जा सकती है.



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