Sump house under construction could not be ready for one year, if the water level of old Gandak increased by one foot, then there would be heavy water logging in Sikandarpur when the sluice gate is closed. | एक साल से निर्माणाधीन संप हाउस नहीं हो सका तैयार, बूढ़ी गंडक का जलस्तर एक फीट बढ़ा तो स्लुइस गेट बंद होने पर सिकंदरपुर में फिर होगा भारी जलजमाव


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मुजफ्फरपुर2 मिनट पहलेलेखक: शिशिर कुमार/ गुलशाद

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सिकंदरपुर बांध के पास स्लुइस गेट की ये है स्थिति। - Dainik Bhaskar

सिकंदरपुर बांध के पास स्लुइस गेट की ये है स्थिति।

  • इस आउटलेट से दो वार्डों के पानी की निकासी का एकमात्र साधन लिफ्टिंग कर पानी बांध की तरफ फेंकना ही है

सिकंदरपुर इलाके से पानी की निकासी का एकमात्र जरिया बूढ़ी गंडक बांध पर बना स्लुइस गेट है। यह गेट जब तक खुला रहता है, तब तक मोहल्ले के पानी के बहाव में ज्यादा परेशानी नहीं होती। लेकिन, बरसात में जब दो वार्डों का पानी सिकंदरपुर बांध किनारे प्रभात जर्दा फैक्ट्री रोड में जमा होता है। वार्ड-13, 14 के साथ बरसात के समय वार्ड-12 के कई मोहल्लों का पानी भी यहां आता है।

उसी वक्त बूढ़ी गंडक नदी का स्तर ऊंचा होने के कारण स्लुइस गेट भी बंद हो जाता है। नतीजा, सिकंदपुर में भारी जलजमाव। यह समस्या अभी नहीं वर्षों से है। बरसात के समय इस पानी की निकासी का एकमात्र साधन लिफ्ट कर पानी को बांध की दूसरी तरफ बूढ़ी गंडक नदी की ओर फेंकना ही है। बावजूद इसके नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक पंप आदि की व्यवस्था नहीं की गई है।

बांध किनारे एक संप हाउस भी बन रहा है। लेकिन, लोगों का कहना है कि 5-7 पीलर खड़ा कर साल भर से यह ऐसे ही पड़ा है। जबकि बूढ़ी गंडक नदी का जल स्तर और स्लुइस गेट से निकासी का स्तर अब लगभग बराबर में आ चुका है। बांध पर रहने वाली रागिनी ने कहा कि एक से डेढ़ फीट और नदी का पानी बढ़ने पर स्लुइस गेट बंद करना होगा। इसके बाद तो सिकंदरपुर इलाके में भारी जलजमाव हो जाएगा।

नगर निगम शहर की इस सबसे बड़ी समस्या के समाधान के जरूरी उपाय में अब भी है विफल

लोगों ने कहा – बूढ़ी गंडक नदी की ओर ठीक से नहीं होती सफाई
स्लुइस गेट से बूढ़ी गंडक नदी की ओर कभी भी ठीक से सफाई नहीं कराई जाती है। यह भी इस इलाके में जलजमाव की समस्या की बड़ी वजह है। उस ओर राज्यपाल के नाम से जमीन भी अधिग्रहण किया गया। इसके बाद भी पानी का बहाव दो फीट में ही है। नगर निगम को इस ओर ध्यान देना चाहिए और पानी के बहाव का रास्ता बनाना चाहिए। -रमेश गुप्ता, सिकंदरपुर।

आउटलेट से जुड़ीं बाधाएं, जो दूर नहीं हुई
इस इलाके का पानी बरसात में संप हाउस से लिफ्ट कर नदी में फेंकना ही उपाय है। इस निर्णय की स्वीकृति भी मिली। लेकिन, काम जमीन पर नहीं है।
सिकंदरपुर रोड से नाला स्लुइस गेट तक जाता है। आम दिनों में तो इससे निकासी में फिलहाल समस्या नहीं है। बारिश में इस नाले के बहाव की क्षमता कम होने से सड़कों पर जलजमाव हो जाता है।
दो से तीन वार्डों से पानी की निकासी के लिए स्लुइस गेट तक कम से कम पांच फीट चौड़ा ड्रेनेज होना चाहिए। लेकिन लोगों की मांग के बावजूद अब तक इस पर काम नहीं हुए।
स्लुइस गेट से बूढ़ी गंडक नदी तक कच्चा नाला कचरा और जंगल-झाड़ से पटा हुआ है।
स्लुइस गेट 15 जून के बाद आमतौर पर बंद हो जाता है। उस स्थिति में पानी की निकासी के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।

जितना खर्च पंपसेट व डीजल पर, उतने में संप हाउस बन जाता

हर साल बरसात में तीन महीने के लिए पांच पंप सेट के साथ-साथ डीजल और स्टाफ लगाए जाते हैं। इसके बदले एक संप हाउस बन जाता तो काफी समस्या दूर हो जाती। स्लुइस गेट और वहां तक नाले की चौड़ाई भी ढाई फीट है। बरसात में स्लुईस गेट बंद होते इस एरिया में 6 फीट जलजमाव हो जाता है। बूढ़ी गंडक नदी की ओर भी अतिक्रमण है। -रतन कुमार, वार्ड पार्षद

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