The US Secretary of State has said that China is increasing the military along the India border, only governments that wish to increase their domination do so. | विदेश मंत्री पोम्पियो बोले- चीन भारत की सीमा पर सैनिक बढ़ा रहा, दबदबा कायम करने वाली सरकारें ही ऐसा करती हैं


  • अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा-पिछले दो हफ्ते से चीन और भारत के बीच तनाव बढ़ रहा है, आखिर ये हो क्या रहा है?
  • पोम्पियो ने यह भी कहा- चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अब भी वुहान से फैले कोरोना वायरस की जानकारी छिपा रही है

newsjojo

Jun 02, 2020, 04:17 PM IST

वॉशिंगटन. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भारत-चीन सीमा पर बढ़ते तनाव पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने सोमवार को एक इंटरव्यू में कहा कि आज भी हम देख रहे हैं कि चीन भारत के उत्तरी हिस्से में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। वह विस्तार करना चाहता है। दबदबा कायम करने वाली सरकारें ही ऐसा करती है। चीन ने कई ऐसे काम किए हैं जो बताते हैं कि वह अपनी ताकत बढ़ाना चाहता है।

पोम्पियो ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में उत्तर सिक्किम और लद्दाख में भारत और और चीन की सेना ने कई चीजें जुटाई हैं। दो हफ्ते से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है। अब तक इसका कोई हल नहीं निकाला जा सका है। आखिर ये हो क्या रहा है?

चीन ने हॉन्गकॉन्ग की आजादी छीन ली
पोम्पियो ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अब भी वुहान से फैले कोरोनावायरस की जानकारी छिपा रही है। इससे दुनियाभर में महामारी को रोकने में देरी हुई। इसने हॉन्गकॉन्ग के लोगों की आजादी बर्बाद कर दी। चीन क्या सोचता है, इसकी बानगी इन दो चीजों से मिल सकती है। चीन की दूसरों की बौद्धिक संपत्ति चुराने की कोशिशें बदस्तूर जारी है। वह दक्षिण चीन सागर में भी अपनी ताकत बढ़ाना चाहता है। चीन के ये ऐसे काम है, जिसका पूरी दुनिया पर असर पड़ेगा। 

20 साल में अमेरिका ने चीन को उचित जवाब नहीं दिया

अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक, पिछले कई सालों से चीन अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। उसका कड़े तेवर दिखाना भी बदस्तूर जारी है। वह दुनिया में सभी जगहों पर सड़क और पोर्ट बना रहा है, ताकि उसकी सेना पहुंच सके। 20 साल में अमेरिका ने चीन की इन गतिविधियों का सही ढंग से जवाब नहीं दिया। हमने 150 करोड़ लोगों के चीनी बाजार को अमेरिका की अर्थव्यवस्था की लिहाज से अहम समझा। हमें लगा कि अगर चीन पर कार्रवाई करते हैं तो वह दूसरे देशों को हमारा साथ देने से मना कर देगा।



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